कभी कभी लगता है जैसे
नहीं जानता हूँ
अपने आप को
कभी कभी लगता है जैसे
क्या चाहता हूँ
नहीं पता है मुझको
कभी कभी लगता है जैसे
मुझमें है समायी
इस प्रकृति कि शक्ति सारी
कभी कभी लगता है जैसे
अब अपने आप को
है टटोलने कि बारी
कभी कभी लगता है जैसे
कर लूं अपने
इरादों कि आज़माइश
कभी कभी लगता है जैसे
पूरी कर लूं
इस दिल कि हर ख्वाहिश
कभी कभी लगता है जैसे
आत्म-मंथन कि है ज़रुरत
कभी कभी लगता है जैसे
दिखा दूं दुनिया को
मुझमे है हिम्मत !
कभी कभी लगता है ऐसे
कभी कभी लगता है ऐसे...
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